भारतीय सड़कों का कड़वा सच और ज़िंदगी की कीमत
कुछ दिन पहले मैंने एक वीडियो क्लिप देखी, जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया. इसमें एक भारतीय ट्रक ड्राइवर की लापरवाही की वजह से अमेरिका जैसे देश में अप्रवासी ड्राइवरों पर ट्रक चलाने से प्रतिबंध लगा दिया गया. यह खबर सुनने में भले ही दूर की लगे, लेकिन इसने मुझे हमारे देश की सड़कों का एक कड़वा सच दिखाया.
जिस तरह की गलती उस ड्राइवर ने की, वैसी गलतियां हम भारत में रोज़ देखते हैं. गलत दिशा में गाड़ी चलाना, बिना इंडिकेटर दिए मुड़ना, और ओवरटेक करना — ये सब हमारे लिए आम बात हो गई है. हम अक्सर अपने आसपास के हाईवे पर देखते हैं कि लोग बस कुछ मिनट बचाने के लिए अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डाल देते हैं. मुझे तो अब डर लगता है, जब मैं किसी ट्रक को तेज रफ्तार से गलत दिशा में आते देखता हूँ.
सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि हमारे देश में जिंदगी की कीमत मानो कुछ है ही नहीं. अमेरिका जैसे देश में एक ड्राइवर की गलती से इतना बड़ा कदम उठाया गया, लेकिन हमारे यहाँ आए दिन लोग सड़क दुर्घटनाओं में मरते हैं और दोषियों को शायद ही कभी कड़ी सजा मिलती है.
हम अपनी गाड़ी से किसी कुत्ते को छू लेने पर भी ग्लानि महसूस करते हैं, लेकिन कुछ लोग इंसानों को कुचलकर कैसे चैन से सो पाते हैं? यह सवाल मुझे परेशान करता है.
यह सोचना गलत नहीं है कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब भारत में भी नियमों को तोड़ने वालों को चुन-चुनकर सजा दी जाएगी. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक हमें खुद ही सतर्क रहना होगा और सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेना होगा. क्योंकि सड़क पर सिर्फ हमारी ही नहीं, बल्कि हर एक इंसान की जिंदगी की कीमत जुड़ी होती है.
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