पापा का जन्मदिन – एक स्मृति का उत्सव

आपका जन्मदिन – एक स्मृति का उत्सव”

आज वो दिन है पापा,
जब हर साल घर में रौनक होती थी,
आपके चेहरे की मुस्कान
सबको एक साथ लाती थी।

पर आज…
आप नहीं हो — और सब कुछ है,
फिर भी सब कुछ अधूरा सा है।

आज के दिन समझ नहीं आता —
आपकी याद में आँसू बहाऊँ,
या आपकी हँसी को जी लूँ?
आपका जाना दुख देता है,
पर आपकी याद — एक ताक़त भी है।

मैं नहीं चाहता कि यह दिन
कभी भी किसी आम तारीख़ की तरह खो जाए,
क्योंकि जब तक यह तारीख़ ज़िंदा है —
आप भी ज़िंदा हैं।

मैं अपने बेटे को बताऊँगा आपके बारे में —
कि उसके बाबा कैसे थे,
कैसे उन्होंने संघर्ष किया,
कैसे उन्होंने बिना कहे सब कुछ दे दिया।

आपकी विरासत मैं आगे बढ़ाऊँगा,
आपके उस प्रेम को जीऊँगा
जो आपने हर बार चुपचाप बाँटा।

आप जहाँ भी हों —
निश्चिंत रहिए,
आपका बेटा आज भी
हर जन्मदिन पर
आपको प्रेम से याद करता है…
और करता रहेगा।

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